शुक्रवार, 27 मार्च 2009

वह मजदूर - २

ऊपरी हिस्से से चली
नीचे के तरफ़ बढती
चूने लगी कुछ क्षण बाद
टिप टिप टिप टिप
नीचे की उर्वर भूमि तक
पहुँचती ,
तरलता प्रदान करती
शीतलता देती
शरीर के सम्पूर्ण हिस्से को
झकझोर देने के बाद
वेदनामय वातारण में
पोंछता एक एक हिस्से से
शरीर का पसीना
वह मजदूर
गहरी लम्बी साँस लेते
श्रम के उस लम्हे से
कर्म को दे प्राथमिकता
फ़िर भी
सुख सुविधाओं से दूर
वह मजदूर ... ॥